मोदी सरकार में बेलगाम होती बेरोजगारी

मोदी सरकार में बेलगाम होती बेरोजगारी

भारत में मोदी सरकार ने बेरोजगारी की एक अनोखी मिसाल कायम की है। जो हर दिन एक नई चरण सीमा पार करती जा रही है। इस महीने की शुरुआत में खबर आई थी की बीते साल 1.10 करोड़ नौकरियां खत्म हुई है। एनएसएसओ के रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। वर्ष 2017 -18 के दौरान भारत में बीते 45 सालों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी थी । सरकार गरीब को 10% आरक्षण देने की बात तो कह रही है लेकिन जब नौकरियां ही नहीं है तो आरक्षण देने क्या अवचित है। 137 करोड़ आबादी वाले देश में जहां 65% आबादी युवाओं की है जिसमें अधिकतर युवा बेरोजगार हैं। सितंबर से दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के अनुसार ग्रैजुएट लोगों में बेरोजगारी दर 13.2% हो गया है जो पहले 12.1% था। जो काफी ज्यादा है। भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी कहते हैं चाय पकौड़ा बेचना भी एक रोजगार है लेकिन शायद यह बात नहीं जानते हैं। जो व्यक्ति यह काम कर रहा है वो नहीं चहता है उसका बेटा जो मेहनत करके पढ़ रहा है वो चाय पकौड़ा बेचे। हाल ही में निकली रेलवे में ग्रुप डी की नौकरी में 2 करोड लोगों ने आवेदन किया। पात्रता केवल दसवीं थी लेकिन आवेदन करने वालों में दसवीं पास श्रेणी में केवल 17 लाख लोग थे। बाकी सब ग्रेजुएट, इंजीनियर,मैनेजमेंट, मैट्रिक्स डिग्री लिए हुए थे। बात अगर महिलाओं के रोजगार की हो तो स्थिति और खराब है महिलाओं में 35%महिलाएं इस बेरोजगारी के चक्रवियु में फसी हुई है जिससे निकलना मुश्किल है। मोदी सरकार ने जो अभियान चलाए“डिजिटल इंडिया” और ” मेक इन इंडिया” से तस्वीर नहीं बदली। मोदी सरकार में जितनी बेरोजगारी दर बढ़ी है उतनी ही महंगाई की मार लोगो पर पड़ी है। जिस गैस सिलेंडर के दाम वर्ष 2013में ₹414 थे वह वर्ष 2018 तक आते-आते ₹945 हो गए। पेट्रोल के दाम जो कांग्रेस सरकार में ₹45 प्रति लीटर है आज ₹91 प्रति लीटर हो गया है। मोदी जी के राज में बच्चे और महिलायें तक सुरक्षित नहीं है। महिलाओं के खिलाफ अत्याचार 18532 से दोगुना होकर 38954 हो गए हैं। हर साल किसान 12000 कर्ज माफी न होने के कारण आत्महत्या कर रहा है। देश की अर्थव्यवस्था सकल उत्पाद वृद्धि दर कम होता जा रहा है। विदेशी निवेश वृद्धि दर34% से घटकर 1.5% हो गया है। NPA 2.4 लाख करोड़ से 13 लाख करोड़ हो गई है। क्या यही अच्छे दिन के वादे आप ने किए थे नरेंद्र मोदी जी।

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